सांस्कृतिक क्षरण का प्रतिफल है - विवाह विच्छेद
सांस्कृतिक क्षरण का प्रतिफल है - विवाह विच्छेद डॉ. साधना गुप्ता आज समाज में प्रत्येक व्यक्ति परेशान है,-अकेलेपन से। विज्ञान ने विश्व ग्राम की संकल्पना को भले ही सार्थक कर दिया हो परन्तु ग्राम्य जीवन की आत्मीयता के भाव कहीं खो गए है। दर्द हल्का करने वाला कन्धा और गोद दोनों का अभाव सा हो गया है। ऐसे में दाम्पत्य सम्बन्धों की रसमयता भी सूख गयी और उसका स्थान ले लिया अधिकारों ने, स्वत्व की प्रतिस्पर्धा में छिन्न- भिन्न होते सम्बन्ध और चरमराते पारिवारिक ढ़ाचे का मूल कारण क्या है? इसी की खोज करने का प्रयास हमारा यह आलेख है। अपनी भाषा एवं संस्कृ...